

अहिल्यानगर: महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक वनीकरण विभाग के तहत श्रीरामपुर तालुका में मातापुर से कारेगांव सड़क पर महत्वाकांक्षी वृक्षारोपण योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का संदेह है. इस मामले में चल रही जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. शिकायतकर्ताओं के आरोपों के अनुसार, लाखों रुपये की इस योजना में सरकारी धन का दुरुपयोग और फर्जी उपस्थिति दिखाकर बड़ा घोटाला किया गया है.
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जांच की सुनवाई के दौरान उपस्थित वन परिक्षेत्र अधिकारी (एम. कोळी) को अपने ही तालुका में चल रहे इस वृक्षारोपण कार्य के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. जब शिकायतकर्ताओं ने उनसे पूछा कि क्या यह काम पूरा हो गया है, तो वे इसका जवाब नहीं दे पाए. इससे संबंधित अधिकारियों की कार्यक्षमता और काम पर नियंत्रण पर सवाल खड़ा हो गया है.
इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए, सहायक वन संरक्षक (उत्तर) (सामाजिक वनीकरण) अहिल्यानगर, श्रीमती एस. ए. केसरकर जिने 16 जुलाई 2025 को सुबह 11 बजे वन परिक्षेत्र कार्यालय, सामाजिक वनीकरण, श्रीरामपुर में इस मामले की जांच की. इस दौरान शिकायतकर्ता, वन परिक्षेत्र अधिकारी (एम. कोळी) और उनके अन्य कर्मचारी, साथ ही अन्य संबंधित व्यक्ति उपस्थित थे. श्रीमती केसरकर द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण में मातापुर से कारेगांव सड़क पर केवल 430 पेड़ लगाए जाने का खुलासा हुआ. जबकि, इस योजना में 1000 पौधे लगाने का प्रस्ताव था. विशेष बात यह है कि स्थानीय नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ये 430 पेड़ स्थल निरीक्षण से मात्र 4 से 5 दिन पहले ही लगाए गए थे.
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, यह पूरा काम केवल 2 दिनों में निपटाया गया है, और इसके लिए 265 मानव-दिवसों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई है. शिकायत आवेदन में मुख्य आरोप लगाया गया था कि श्री. दत्तात्रेय विश्वनाथ कानडे की अनुपस्थिति के बावजूद, उनके स्थान पर अन्य व्यक्तियों की तस्वीरें दर्ज कर झूठी उपस्थिति दिखाई गई. इस प्रकार सरकारी धन का दुरुपयोग और बड़ा भ्रष्टाचार स्पष्ट रूप से दिख रहा है.
शिकायतकर्ताओं, विशेष रूप से श्री. शिवाजी दांडगे और राजेश बोरुडे ने इस मामले में दोषी पाए जाने वाले सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर, विशेष रूप से वन परिक्षेत्र अधिकारी (एम. कोळी) पर भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है. साथ ही, उन्होंने सामाजिक वनीकरण विभाग, श्रीरामपुर के माध्यम से तालुका में अन्य सभी वृक्षारोपण और संबंधित कार्यों की व्यापक जांच (ऑडिट) की भी मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह के भ्रष्टाचार को रोका जा सके और सरकारी धन का उचित उपयोग सुनिश्चित हो सके. उन्होंने यह भी मांग की है कि इस जांच की रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई की जानकारी उन्हें सूचित की जाए.
इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री, वन मंत्री, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और जिलाधिकारी को भी दी गई है. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस गंभीर मामले की गहन जांच होकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाता है.










